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शिमला-धर्मशाला NH पर फिर लैंडस्लाइड, HRTC बस बाल-बाल बची; 6 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

भराड़ीघाट में लैंडस्लाइड से शिमला-धर्मशाला NH बंद, HRTC बस चपेट में आने से बची

आज 6 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, मंडी-सिरमौर में ऑरेंज अलर्ट

19 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रहने का पूर्वानुमान, भूस्खलन क्षेत्रों से दूर रहने की एडवाइजरी


शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून के बीच बारिश और भूस्खलन का खतरा लगातार बना हुआ है। शिमला-धर्मशाला नेशनल हाईवे पर भराड़ीघाट के पास गुरुवार रात अचानक लैंडस्लाइड हो गया। इस दौरान सवारियों से भरी HRTC बस मलबे और चट्टानों की चपेट में आने से बाल-बाल बच गई। लैंडस्लाइड के बाद हाईवे पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो गई और मार्ग सभी प्रकार के वाहनों के लिए बंद हो गया।

भराड़ीघाट में जिस स्थान पर यह घटना हुई है, वह पहले से ही संवेदनशील बना हुआ है। करीब तीन दिन पहले इसी जगह बड़ी चट्टानें गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि उसकी पत्नी और बेटी घायल हुई थीं। ऐसे में दोबारा लैंडस्लाइड होने से क्षेत्र में खतरा और बढ़ गया है।

छह जिलों में आज बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग IMD ने हिमाचल प्रदेश में अगले कई दिनों तक मौसम को लेकर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। शुक्रवार को मंडी और सिरमौर जिले में कुछ स्थानों पर भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

इसके अलावा ऊना, बिलासपुर, चंबा और कांगड़ा में भारी बारिश को लेकर यलो अलर्ट दिया गया है। बीती रात कांगड़ा जिले में भी कई स्थानों पर मूसलाधार बारिश हुई, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

मौसम विभाग के अनुसार बारिश का यह दौर आने वाले दिनों में भी जारी रह सकता है। ऐसे में पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वालों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

15 अगस्त को भी छह जिलों में यलो अलर्ट

स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त को भी प्रदेश के छह जिलों में बारिश को लेकर यलो अलर्ट रहेगा। इनमें बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और सिरमौर जिले शामिल हैं।

इसके बाद 16 अगस्त को कांगड़ा, मंडी, सिरमौर और शिमला में तेज बारिश होने का पूर्वानुमान है। मौसम विभाग ने 17 अगस्त से पश्चिमी विक्षोभ के फिर से सक्रिय होने की संभावना जताई है, जिसके कारण प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

17 और 18 अगस्त को बहुत भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने 17 और 18 अगस्त को प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। 17 अगस्त को सिरमौर, कांगड़ा और ऊना जिले के लिए ऑरेंज अलर्ट है।

वहीं चंबा, कुल्लू, मंडी, शिमला और सोलन में यलो अलर्ट जारी किया गया है। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, अचानक बाढ़ और सड़कें बंद होने का खतरा बढ़ सकता है।

19 अगस्त तक बारिश से राहत नहीं

IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक प्रदेश में 19 अगस्त तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। इसे देखते हुए लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है।

प्रशासन और मौसम विभाग की ओर से लोगों को खासकर नदी-नालों, खड्डों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचना भी सुरक्षित माना जा रहा है।

पहाड़ी सड़कों पर अचानक चट्टानें और मलबा गिरने की घटनाएं सामने आ सकती हैं। ऐसे में वाहन चालकों को सड़क की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही यात्रा करने और संवेदनशील स्थानों पर विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।

मानसून सीजन में सामान्य से 9 फीसदी कम बारिश

हिमाचल में इस मानसून सीजन के दौरान अब तक कुल बारिश सामान्य से 9 फीसदी कम दर्ज की गई है। प्रदेश में एक जून से 13 अगस्त तक सामान्य तौर पर 486.2 मिलीमीटर बारिश होती है, जबकि इस बार इसी अवधि में 441.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।

जिलावार आंकड़ों में बारिश की स्थिति में काफी अंतर देखने को मिला है। बिलासपुर में सामान्य से 10 फीसदी, हमीरपुर में 49 फीसदी, कांगड़ा में 17 फीसदी, लाहौल-स्पीति में 51 फीसदी, मंडी में 25 फीसदी, सोलन में 11 फीसदी और ऊना में 7 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई है।

दूसरी ओर कुछ जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हुई है। चंबा में 3 फीसदी, किन्नौर में 20 फीसदी, कुल्लू में 29 फीसदी, शिमला में 25 फीसदी और सिरमौर में 7 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई है।

बारिश के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह

लगातार बदलते मौसम और संवेदनशील पहाड़ी भूभाग को देखते हुए लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेने की जरूरत है। भारी बारिश के दौरान नदी-नालों के किनारे जाने, भूस्खलन संभावित स्थानों पर रुकने और बिना जरूरी काम के लंबी यात्रा करने से बचना चाहिए।

खासकर उन सड़कों पर यात्रा करते समय सावधानी बरतनी जरूरी है, जहां पहले भी भूस्खलन या चट्टानें गिरने की घटनाएं हो चुकी हैं। भराड़ीघाट में HRTC बस का हादसे से बच जाना एक बार फिर बताता है कि इन दिनों पहाड़ी सड़कों पर यात्रा कितनी जोखिम भरी हो सकती है।